Blogs & Articles

  1. home
  2. blogs

 

अयोध्या पर फैसला आने की सुबह के साढ़े सात बजे सब्जी बेचने वाले एक युवक ने अचानक पूछ लिया कि बाबूजी! आज क्या हाने वाला है? तो उन्होंने कहा कि हो सकता है कि सुप्रीम कोर्ट मंदिर की समस्या को निपटा दे। मंदिर बनवा दे। वह बोला मस्जिद का क्या होगा ? तो उन्होंने कहा कि हो सकता है कि अदालत मस्जिद के लिए भी कोई व्यवस्था कर दे! वह तपाक से बोला यही ठीक होगा। अगले-रोज सोसाइटी के गेट से निकलते ही एक बुद्धिजीवी मित्र टकरा गए। देखते ही उलाहना देने लगे कि ‘करवा दिया फैसला’! उन्होंने भी ऐसे ही कह दिया ं‘हुइहै वही, जो राम रचि राखा’ तो वे उपहास में जोर से हंसे मानो यह कहकर कोई अपराध कर दिया हो। सब्जी वाले की चिंता थी कि मंदिर-मस्जिद का मामला हमेशा के लिए निपट जाए। मंदिर बने तो मस्जिद भी बन जाए! लेकिन बु़िद्धजीवी जी की मंशा फैसले की हंसी उड़ाने की थी। सब्जी बेचने वाला कोई मुसलमान नहीं है! न वह किसी दल का राजनीतिक कार्यकर्ता है, बल्कि अपनी सब्जी बेच कर रोजी-रोटी कमाने से मतलब रखने वाला आम आदमी है। साधारण मनुष्य सरलता से सोचता समझता है, जबकि पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी वर्ग का काम सरल को भी ‘असरल’ बनाने का होता है। आजकल के बु़िद्धजीवी कोई ‘मनीषी’ नहीं होते, वे या तो एनजीओ छाप होते हैं या एडवोकेसी समूह के प्रवक्ता होते हैं, जो किसी भी ‘विवाद’ के बने रहने में ही अपना करिअर समझते हैं। अयोध्या में मंदिर-मस्जिद संबंधी फैसले के आने के बाद ऐसे ही तत्व सबसे अधिक ‘चिंतित’ नजर आते हैं। वे सोचते हैं कि अगर मंदिर-मस्जिद विवाद निपट गया, तो वे बेरोजगार हो जाएंगे! साधारण जीवन जीने वाला आदमी भी किसी जटिल समस्या को अपनी सहजानूभूति और सहज बुद्धि से सीधे तरीके से समझता है जबकि बुद्धिजीवी तर्क-वितर्क की ‘गांठ’ लगाकर समझता है। अयोध्या मामले में बाबरी की जगह पर आर्कियोलाॅजिकल सर्वे द्वारा की गई ‘खुदाई’ पर लगाई गई राजनीतिक ‘गाठों’ को देखा जा सकता है कि किस तरह बाबरी के नीचे दबे ‘गैर इस्लामिक’ अवशेषों पर तरह-तरह की शंकाएं और प्रश्न उठाए गए और अब जब अदालत ने उस सर्वे की रिपोर्ट पर मुहर लगा दी, तो सारे तथाकथित विशेषज्ञ अचानक बहस से बाहर हो गए। यह तो एतिहासिक है कि मध्यकाल में जो इस्लामी आक्रांता आते थे, तो वे ‘प्रसाद’ बांटने नहीं आते थे, बल्कि अपनी ‘विजयी धर्मध्वजा’ थोपने आते थे। यह एक कटु-सत्य है कि कई इस्लामी आक्रांता तो ‘गजवा ए हिंद’ का इरादा लेकर भी आए थे।