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दुनियाभर में इंटरनेट का उपयोग करने वालों की संख्या बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन युनियन के अनुसार विश्व की आधी से अधिक आबादी इंटरनेट युजर है। पश्चिमी देशों से शुरू हुई इंटरनेट क्रान्ति दूसरे अध्याय में प्रवेश कर चुकीं हैं। अब अधिकतर युजर गरीब देशों में है क्योंकि इंटरनेट गरीबों का मनोरंजन है। करीबन 72 करोड़ 60 लाख व्यक्ति पिछले 3 वर्षों में आनलाईन हुए है। 2000 में ब्राजील मे सब्सिड़ी पर हजारों साइबर कैफे खोले गए तो गरीब बस्तियों में इंटरनेट की पहुँच 60 प्रतिशत तक हो गई क्योंकि कम्प्यूटर गेम खेलने में इसका बहुत उपयोग किया गया। बड़ी संख्या में रेसिपी भी सिखी जा रही हैं।  

अब लगने लगा है कि इंटरनेट बगैर इंटरनेट के दुनिया चलना बहुत मुश्किल है। अकेले भारत में मोबाईल इण्टरनेट सेवा के सब्सक्राईबर की संख्या 2016 के अंत से 2018 के अंत तक 21 करोड़ 80 लाख से बढ़कर 50 करोड़ हो गई। सस्ते फोन और डेटा ने तस्वीर बदली। डेटा पैकेज की किमत 94 तक घटी है। डेटा का उपयोग प्रतिमाह 10 गुना बढ़कर 88 लाख प्रति सब्सक्राईबर हो गया यानि अमरिकियों की तुलना में 3 गुना अधिक डेटा का उपयोग भारतीय करते है। सबसे अधिक तो विड़ियों देखे जा रहे हैं। 2016 में 10 लाख सब्सक्राईबर के साथ केवल 20 भारतीय यू.ट्यूब चैनल चला रहे थे। जबकि अब लगभग 600 है।