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जो राक्षस हैं उनको नरक में जाना पड़ेगा.......

(परम पूज्य श्रीमाताजी निर्मला देवी, कॅक्सटन हॉल, लंदन, 26 नवम्बर 1982)

साधकः माँ ! न्यक्लियर वॉर के खतरे के लिये क्या किया जा सकता है?

श्रीमाताजीः यदि आप परमात्मा पर विश्वास करते हैं तो इस बारे में सोचना ही बंद कर दीजिये। हर चीज को डिफ्यूज किया जा सकता है। क्यों ऐसा है कि नहीं? यदि परमात्मा की इच्छा हो तभी युद्ध हो सकता है अन्यथा बिल्कुल नहीं, लेकिन इसके लिये लोग भी ऐसे ही होने चाहिये, तभी परमात्मा हस्तक्षेप करते हैं। यदि सब लोग राक्षसी प्रवृत्ति के हों तब तो युद्ध का होना ही अच्छा है। एक इंग्लिश मुहावरा है कि मनुष्य केवल प्रस्ताव कर सकता है परंतु भगवान उस प्रस्ताव को अस्वीकार भी कर सकता है। आप लोग ये सब कुछ भूल गये थे।

न्यक्लियर युद्ध भी मनुष्यों की ही देन है। है कि नहीं?  मनुष्य भगवान की रचना है। इसलिये भगवान कभी भी नहीं चाहेगा कि उसके बच्चे ये सब कारस्तानियाँ करें, लेकिन यदि वे मूर्खता करें तो उन सबके लिये युद्ध ही अच्छा है। गधों और मूर्खों को बचाने का क्या फायदा? केवल आत्मसाक्षात्कारी लोगों को ही बचाया जायेगा। वैसे कोई मरता वरता नहीं है। वे फिर से जीवित हो जाते हैं, लेकिन केवल मासूम और निष्कलंक लोगों को बचाया जा सकता है और जो राक्षस हैं उनको नरक में जाना पड़ेगा।

Seeker: What can be done about the threat of nuclear war?

Shri Mataji: If you believe in God just don’t think about it! (laughter) Everything can be diffused isn’t it.

It’s only if God wants [that] there will be war otherwise there cannot. But there should be people for whom God should interfere. If all of them are horrible devils, it’s better to have a war.

Man proposes and God disposes – this is [an] English proverb!

You have forgotten all that.

Nuclear war is the creation of human beings. Alright? And human beings are the creation of God. So the Creator, is not going to allow these stupid children to work it out.

But in case they are that stupid, all of them put together, let them have it!

What’s the use of also saving stupid people and donkeys? Only the people who are realised souls will be saved, because nobody dies, they will be re-born again, those who are innocent. And those who are devils will go to hell. Alright?

What you can do, Caxton Hall, London (UK), 26 November 1982.-