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भारत में उत्तरप्रदेश में सरयु नदी के तट पर बसा प्राचीन धार्मिक नगर अयोध्या में प्रभू श्रीराम की जन्मभूमि है। मान्यता है कि ‘मनु’ ने इसे बसाया था और इसे अयोध्या का नाम दिया था। अयोध्या का अर्थ है अन्युध अर्थात् जहां कभी कुछ नहीं होता। इसे कौशल देश भी कहते है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अयोध्या में सूर्यवंशी/रघुवंशी राजाओं का राज हुआ करता था जिसमें श्रीराम ने अवतार लिया था। यहां 7 वीं शताब्दी में चीनी यात्री हेनसांग आया था। उसके अनुसार यहां 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3000 भिक्षु रहते थे। यह सप्तपुरियों में से एक है अर्थात् ‘‘अयोध्या, मथुरा, माया, काशी कांची, अवंतिका, द्वारिका, चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः’’ इन सात नगरों को पुराणानुसार मोक्षदायक तीर्थ कहे गये हैं। इसकी जनसंख्या सन् 2011 के अनुसार 567456, घनत्व 5,458.01 कि.मी. (14,136 मील) क्षेत्रफल 10.24 कि.मी., ऊँचाई 93 मीटर (305 फीट) है। अथर्ववेद में यौगिक प्रतिक के रूप में अयोध्या का उल्लेख है। - ‘‘अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोद्धा। तस्यां हिरण्मयः कोशः स्वर्गो ज्योतिषावृतः।। (अथर्ववेद-10.2.31) 

रामचरितमानस के उत्तरकांड के मंगला चरण जीवंत हो उठा हैं।- 

चैपाई- इहाँ भानुकुल कमल दिवाकर। कपिन्ह देखावत नगर मनोहर।। 

सुनु कपीस अंगद लंकेसा। पावन पुरी रूचिर यह देसा।। 

जद्यपी सब बैकुंठ बखाना। बेद पुरान बिदित जगु जाना।।

अवधपुरी सम प्रिय नहिं सोऊ। यह प्रसंग जानई कोउ कोऊ।।

जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि।। 

जा मज्जन ते बिनहिं प्रयासा। मम समीप नर पावहिं बासा।। 

अति प्रिय मोहि इहाँ के बासी। मम धामदा पुरी सुख रासी।। 

हरषे सब कपि सुनि प्रभु बानी। धन्य अवध जो राम बखानी।। 

 

दोहा/सोरठा 

आवत देखि लोग सब कृपासिंधु भगवान।

नगर निकट प्रभु प्रेरेउ उतरेउ भूमि बिमान।। 4 (क)

उतरि कहेउ प्रभु पुष्पकहि तुम्ह कुबेर पहिं चाहु। 

प्रेरित राम चलेउ सो हरषु बिरहु अति ताहु।। 4 (ख) 

प्राचीन नगर अयोध्या के अवशेष उस खंडहर के रूप में रह गए थे जिसमें से कहीं-कहीं कुछ अच्छे मंदिर भी थे लेकिन 9 नवंबर 2019 को सुप्रिम कोर्ट के आदेश के बाद से नया भव्य राम मंदिर बनने को है। नया मंदिर बनने तक रामलला की मूर्ति को जन्मस्थान से एक अस्थाई मंदिर में प्रतिष्ठापित किया है। वर्तमान अयोध्या के प्राचीन मंदिरों में सीता रसोई तथा हनुमानगढ़ी प्रमुख है। जैन मंदिर भी है। वर्ष में तीन मेले (मार्च-अप्रेल, जुलाई-अगस्त, अक्टोबर-नवंबर) लगते हैं। लेकिन सन् 1528 को बाबर ने रामजन्मभूमि स्थल पर मस्जिद का निर्माण करवाया था। 1853 में विरोध होने पर ब्रिटिश शासकों ने हिन्दू व मुस्लिम सेना समुदायों को अलग-अलग हिस्सों में पूजा इबादत की इजाजत दे दी थी। सन् 1885 में महंत रघुवरदास ने चिन्हित स्थल पर मंदिर निर्माण का प्रयास किया तो बाधा पैदा हुई जिससे अदालती कार्यवाही प्रारंभ हो गई। सन् 1949 में हिन्दुओं ने भगवना श्रीराम की मूर्ति रख दी गई तो मुसलमानों ने नमाज पढ़ना बन्द कर दी। सन् 1985 में राजीव गांधी ने विवादित स्थल का ताला खुलवाया था। 1986 में हिन्दुओं को फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने पुजा की इजाजत दे दी। 

25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से अयोध्या तक लालकृष्ण आड़वानी के निर्देशन में निकली रथयात्रा को रोकने के कारण तल्कालीन प्रधानमंत्री श्री वी.पी. सिंह की सरकार गिर गई। उत्तरप्रदेश में भाजपा की कल्याणसिंह सरकार बनी, जिसने विवादित भूमि को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी विध्वंस प्रमाण हुआ। 2002 में इलाहाबाद हाइकोर्ट के तीन जजों की पीठ में सुनवाई शुरू हुई। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से भारतीय पुरातत्व विभाग के द्वारा की गई खुदाई में बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर होने के प्रमाण मिले। मामला 2011 से सुप्रिम र्कोअ में चला गया। 9 नवंबर 1989 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सरकार की अनुमति के बाद प्रस्तावित राममंदिर की नींव पड़ी । तब पहली ईंट विश्व हिन्दू परिषद् कि ज्वाइंट सेकेटरी बिहार के कामेश्वर चैपाल ने रखी थी। शिलान्यास के लिए 2 लाख गांवों से ईंटे आई थी। कामेश्वर चैपाल दलित होकर वैसे ही थे जैसे शबरी (आदिवासी) के बैर। उनके अनुसार वे मिथिला की भूमि से है। इसलिए सभी दलितों के लिए गर्व का पल है। 5 अगस्त 2020 को भाजपा के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर निर्माण का भव्य शुभारम्भ चांदी की ईंट रखकर किया। 

31 मार्च 1986 को श्रीमाताजी द्वारा कोलकत्ता भारत में बताया गया कि इस विवाद का मतलब यह नहीं है की जो प्रथ्वी तत्व ने बनाया है उसकी हम पुजा न करें। अब यह तत्व हमारे यहां पृथ्वी तत्व से निकले जो जागृत स्थान है- आप कैसे जानिएगा कि यह जागृत है या नहीं ? अब यह राम की भूमि है या नहीं ? यह जानने के लिए मुसलमान व हिन्दू दोनों को पार कराईए तो कहेंगे कि यह श्रीराम की भूमि हैं इसमंे शंका नहीं है........जब अंतर्याेग हो जाएगा तो समझ में आ जायेगा मुसलमानों को भी और हिन्दुओं को भी कि श्रीराम की भूूमि हैं और श्रीराम मुसलमानों के लिए कोई दूसरें नहीं है।