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आजकल अच्छा खान पान न होने की वजह से याददाश्त का कमजोर होना एक आम समस्या बन गई हैं। याददाश्त कमजोर होने से कई समस्याएं आती हैं, इससे ग्रसित व्यक्ति कामयाब नहीं हो पाता है। स्मरणशक्ति यादाश्त अर्थात याददाश्त एक ऐसा विषय है जिसके बारे में हर कोई जानना चाहता है। चाहे विद्यार्थी हो या नौकरीपेशा व्यक्ति, गृहिणी हो या वृद्ध। आज की आपाधापी के समय में हर कोई यही कहता नजर आता है कि मेरी याददाश्त कमजोर है या जो पढ़ता हूं याद नहीं रहता। ज्यादातर स्टूंडेंट्स कि याददाश्त में कमजोरी आती हैं। स्टुडेंट्स के माता-पिता को ऐसा लगता हैं, कि बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता, या बच्चे जितनी मेहनत करते हैं उन्हें उसके अनुरूप फल नहीं मिलता। 

परीक्षा के प्रश्न पत्र में लिखते समय मन में डर रहना तथा परीक्षाओं में लिखते समय भूल जाना आज कल आम बात हो गई है। कुछ बच्चे होते हैं, जो एक या दो बार पढ़ने पर याद कर लेते हैं, तो कुछ बच्चे वहीं पाठ्य सामग्री अधिक समय पढ़ने के उपरांत भी कुछ याद नहीं रहता। याददाश्त बढ़ाने हेतु आयुर्वेद तथा योग के अलावा शास्त्रों ने कुछ मं साधना और उपाय भी बताएं हैं। वाल्मीकि रामायण के युद्ध कांड अंतर्गत आदित्यहृदयम् नामावली में उल्लेखित ज्योतिर्गणानाम्पतये नमः का मंत्र भी है।

याददाश्त की समस्या सुर्य नाड़ी से है जब सुर्य नाड़ी अधिक सक्रिय हो जाती है तब वह अत्यधिक सक्रियता के कारण गर्म हो जाती है और जिसका असर यह होता है कि वह कमजोर होने लगती है। यह नाड़ी हमारे शरीर में स्वाधिष्ठान चक्र से दाॅयी साईड़ से होकर मस्तिष्क में बाँयी साईड में जाती है। इसके अधिष्ठाता देवता महासरस्वती है। योग की भाषा में इसे पिंगला नाड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इस नाड़ी का स्वभाव वैसे ही गर्म होता है और जब इस पर हम अपने जीवन में आपाधापी व भागदौड़ का बोझ और बढा देते है तो यह अति सक्रियता के कारण असंतुलित हो जाती है। इससे व्यक्ति में याददाश्त पर विपरीत असर पड़ता है।

इसलिए हमें अपनी पिंगला नाड़ी को शांत रखना होगा। मूलाधार व आज्ञाचक्र चक्र के असंतुलन से भी यह समस्या आती है। सहजयोग मंे श्रीमाताजी की ध्यान पद्धति से नाड़ियों का असंतुलन दूर कर इस समस्या से राहत पायी जा सकती है। दाँयी नाड़ी के लिए श्री महासरस्वती, हनुमान का मंत्र या सुर्य मंत्र का उच्चारण किया जाता है।