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          मनुष्य सुख चाहता है। जैसे भूखे पेट कोई सूखी नहीं रह सकता। इसलिए जब लक्ष्मी घर में आती है, तो हम इस बात से भयभीत होते हैं कि वह हमें छोड़कर चली जाएगी। हमें इस बात का भी डर होता है कि कोई हमारा धन, हमारी लक्ष्मी को हमसे चुरा लेगा। हमारे अंदर एक असुरक्षा जाग उठती है। मनुष्य केवल पैसे कमाने से सुखी नहीं रहता। मनुष्य के लिए सुरक्षित महसूस करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उसे पाने के लिए हम देवी दुर्गा की आराधना करते हैं। इस प्रकार हम जो सुरक्षा चाहते हैं, मानसिक और शारीरिक, उसका रूपक दुर्गा हैं। इस प्रकार जीवन में लक्ष्मी के साथ-साथ दुर्गा का होना भी अति आवश्यक है। 

जिन घरों में पैसा आता है, वहां ये पैसे कई बार कलह की वजह भी बन जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि हमारे पास ज्ञान नहीं है, अर्थात सरस्वती नहीं है। सरस्वती के माध्यम से हम घर में लक्ष्मी ला सकते हैं। सरस्वती केवल नौकरी या कारोबार के माध्यम से लक्ष्मी को घर में लाने के लिए नहीं है बल्कि सरस्वती हमें समझाती हैं कि उनके बिना यदि हमारे घर में लक्ष्मी आती हैं तो वह साथ में अलक्ष्मी (कलह की देवी) को लेकर आएगी। 

लोग कहते हैं कि लक्ष्मी और सरस्वती के बीच में हमेशा संघर्ष होता है। जहां सरस्वती होती है, वहां पर लक्ष्मी नहीं आती और जहां सरस्वती नहीं होती, वहां लक्ष्मी आती है। अर्थात् दोनों ही दशा में दरिद्रता आती हैं और दोनों में से कोई सुखी नहीं रहता लेकिन यह अल्प ज्ञान है, संपुर्ण ज्ञान नहीं। जिसके पास आत्मज्ञान होता है, वह अमीरी और गरीबी दोनों मंे सुख प्राप्त करता है। वह धन को या लक्ष्मी को सही दृष्टिकोण से देखता है यानि सरस्वती यह भी तय करती है कि लक्ष्मी के साथ हमारा कैसा रिश्ता होगा जिससे सुखी रहा जा सके।

सुखी होने के लिए लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा तीनों आवश्यक हैं। जो सहजयोग में नहीं है वे  भारतभर मंे देवियों के मंदिर जाते हैं और जिन्होंने सहजयोग अपना लिया हैं वे अपने भीतर ही इन तीनों देवियों की आदिरूपा श्रीमाताजी निर्मलादेवी की पुजा-अर्चना करते हैं। सहजयोग में निर्विचार ध्यान का महत्व है। सहजयोगियों को परम चैतन्य के रूप में त्रिदेवियों के अंतर्दर्शन होते हैं। जीवन में इन तीनों के संतुलित मेल से हमें सुख मिलता है। बहुत सी बार सभी देवता नाराज हो जायें तो भी हमारी ये माताएं हमारे लिए उन्हें मनाती तक है हांलाकि हर बार यह भी संभव नहीं हैं पर अपने अंदर की पुजा ज्यादा महत्वपूर्ण और आसान है।